Wednesday, 19 October 2011

कहीं दिमाग को बदल रहा फेसबुक!

GAZALAKHAN

फेसबुक पर कितने मित्र हैं आपके? हाल ही में हुए एक अध्ययन में दावा किया गया है कि सोशल नेटवर्किंग साइट पर ढेर सारे दोस्तों वाले व्यक्तियों के दिमाग में एक खास तरह का पदार्थ ज्यादा सघन पाया जाता है जिससे इस बात की संभावना बढ़ी है कि इस तरह के साइट लोगों के दिमाग को बदल रहे हैं। लंदन के यूनिवर्सिटी कॉलेज के अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि जिन व्यक्तियों के फेसबुक पर बहुत ज्यादा दोस्त होते हैं, उनमें दिमाग के कुछ हिस्सों में कम ऑनलाइन दोस्तों वालों की तुलना में ज्यादा ग्रे पदार्थ पाया जाता है। 
दिमाग के ये क्षेत्र नामों और चेहरों को याद रखने की क्षमता से जुड़े होते हैं। प्रोसिडिंग्स ऑफ द रॉयल इसोसाइटी बीरू बायोलोजिकल साइंसेज में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया कि या तो सोशल नेटवर्किंग साइट दिमाग के इन भागों को बदल देते हैं या इस तरह के दिमाग के साथ पैदा लेने वाले व्यक्ति फेसबुक जैसी वेबसाइट पर अलग व्यवहार करते हैं।
प्रस्तुति
गजाला खान
http://visharadtimes.com

Sunday, 9 October 2011

जिन्दगी तेरे नाम

जिन्दगी तेरे नाम


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दुनिया को दिशा देने वाली तीन महिलाओं की कहानी...

GAZALA KHAN
MANAGINGEDITOR
इस वर्ष नोबेल का शांति का पुरस्कार संयुक्त रूप से तीन महिलाओं के नाम रहा। इनमें लाइबेरिया की राष्ट्रपति एलेन जॉन्सन सरलीफ, अफ्रीकी सामाजिक कार्यकर्ता लेमाह जीबोवी और यमन की तवाक्कुल करमान शामिल हैं। इन तीनों को यह पुरस्कार महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों के लिए उनके अहिंसक संघर्ष के लिए दिया जाएगा। आइए जानते हैं कि क्यों मिला इन महिलाओं को नोबेल शांति पुरस्कार..
अफ्रीका की पहली निर्वाचित महिला राष्ट्रपति
एलेन जॉन्सन सरलीफ अफ्रीका की लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित पहली महिला राष्ट्रपति हैं। 2006 में लाइबेरिया का राष्ट्रपति बनने के बाद से उन्होंने यहां शांति स्थापना और महिलाओं की स्थिति मजबूत करने में योगदान दिया है। इस महीने होने वाले चुनावों में वे पुनरू राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार हैं। हालांकि उन पर चुनावों में सरकारी पैसे के दुरुपयोग का आरोप है।
लाइबेरिया में महिलाओं को किया एकजुट
लेमाह जीबोवी ने लाइबेरिया में लंबे समय से जारी युद्ध के अंत के लिए सभी जाति एवं धर्म की महिलाओं को एकजुट किया। पश्चिम अफ्रीका में युद्ध के दौरान और बाद में उन्होंने महिलाओं का प्रभाव बढ़ाने के लिए काम किया। 2009 में उन्हें करेज अवार्ड भी दिया गया।
यमन में सालेह को किया सत्ता से बाहर
32 वर्षीय तवाक्कुल करमान ने यमन में लोकतंत्र एवं शांति स्थापना में अग्रणी भूमिका निभाई। इन्हीं विरोध प्रदर्शनों के कारण जनवरी में यमन के राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह को सत्ता छोड़नी पड़ी। उन्होंने यहां पर महिला अधिकारों के लिए हुए संघर्ष में प्रमुख भूमिका निभाई। करमान पेशे से पत्रकार हैं और इसलाह पार्टी की सदस्य हैं। उनके पिता सालेह की सरकार में मंत्री रह चुके हैं।
तब तक लोकतंत्र नहीं
पुरस्कार देने वाली समिति की विज्ञप्ति में कहा गया है, जब तक महिलाओं को पुरुषों की तरह समाज के हर स्तर पर विकास में समान अवसर नहीं मिल जाता, तब तक हम दुनिया में सही मायने में लोकतंत्र एवं शांति नहीं हासिल कर सकते।
गांधी हैं प्रेरणास्रोत
इस वर्ष का प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार हासिल करने वाली तीनों ही महिलाएं महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित हैं। यमन में राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह के खिलाफ संघर्ष में अहम भूमिका निभाने वाली तवाक्कुल करमान के घर में महात्मा गांधी के साथ मार्टिन लूथर किंग और नेल्सन मंडेला की तस्वीरें लगी हैं।
लाइबेरिया की राष्ट्रपति एलेन जानसन सरलीफ भी अफ्रीकी महाद्वीप में लोकतंत्र के लिए चलने वाले संघर्ष में महात्मा गांधी और मार्टिन लूथर किंग के जीवन को प्रेरणा मानती हैं। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि महात्मा गांधी आजादी की लड़ाई में अङ्क्षहसक प्रतिरोध के महानायक थे।
गांधीजी ने बताया कि अत्याचारी का नाश निश्चित है: जीबोवी
मोनरोबिया (लाइबेरिया) की लेमाह जीबोवी ने अपनी पुस्तक ‘माइटी बी अवर पावर्स’ में लिखा कि घाना में अङ्क्षहसा पर आयोजित एक सम्मेलन के दौरान उन्हें फिल्म ‘गांधी’ देखने का अवसर मिला। महान शांतिदूत के बारे में बनी फिल्म देखना एक शानदार अनुभव था। जीबोवी का मानना है कि दुनिया महात्मा गांधी, नेल्सन मंडेला और दलाई लामा से प्रेरणा ले सकती है।

visharadtimes.com/

Wednesday, 5 October 2011

ताजमहल गिर सकता है 5 साल में

दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताजमहल पर खतरा मंडरा रहा है। ताजमहल के लिए अभियान चलाने वाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर जल्द ही कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले पांच साल में ताज गिर जाएगा। ताज के किनारे बहने वाली यमुना नदी में हो रहा प्रदूषण, वनों की कटाई इसके गिरने का मुख्य कारण हो सकता है।
कार्यकर्ताओं का मानना है कि नदी के प्रदूषित पानी से ताज की नींव कमजोर हो रही है। पिछले साल इसके गुंबद और चार मीनारों में दरार देखी गई थी। अगर जल्द कोई कदम नहीं उठाया गया तो अगले दो से पांच साल में ताज मिट्टी में मिल जाएगा। 358 साल पुरानी प्यार की निशानी सैलानियों के आकर्षण का केंद्र है। इसे देखने के लिए हर साल करीब चार मिलियन पर्यटक यहां आते हैं। जानकारों का कहना है कि अगर ताजमहल की सड़ती बुनियाद को दुरुस्त नहीं किया गया तो लाखों सैलानियों को अपनी तरफ खींचने वाली यह इमारत जल्द ही इतिहास का हिस्सा होगी। जानकारों का कहना है कि पिछले साल ही ताजमहल की चार मीनारों और गुंबद में दरारें देखी गई हैं। इसके साथ ही ताजमहल की बुनियाद भी लगातार कमजोर हो रही है। एक कैंपेन ग्रुप ताजमहल के वजूद पर खतरे का आकलन कर रहा है। इस समूह में इतिहासकार, पर्यावरणविद और नेता शामिल हैं। आगरा के एमपी रामशंकर कठेरिया के हवाले से ‘डेली मेल’ ने कहा है कि अगर ताजमहल पर ध्यान नहीं दिया गया तो दो से पांच साल में ताजमहल गिर जाएगा।

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कठेरिया के मुताबिक, ‘ताजमहल की मीनारों के गिरने का खतरा बढ़ता जा रहा है, क्योंकि इसकी बुनियाद लकड़ी की बनी हुई है और यह पानी की कमी के चलते सड़ रही है।’ उन्होंने कहा, ‘ताजमहल की बुनियाद पिछले तीन दशकों में किसी ने नहीं देखी है। अगर सब कुछ सही है तो वहां किसी को जाने क्यों नहीं दिया जा रहा है?’ ताजमहल पर रिसर्च वर्क करने वाले इतिहासकार राम नाथ ने कहा, ‘ताजमहल यमुना नदी के बिल्कुल किनारे है, लेकिन इसकी नींव में पानी सूख चुका है।।’उन्होंने कहा, ‘इस बात का अनुमान इसके निर्माताओं ने कभी नहीं किया होगा। यमुना नदी ताजमहल के वास्तु का एक अहम हिस्सा है। अगर नदी के वजूद पर संकट आता है तो ताजमहल टिका नहीं रह सकता है।’

Tuesday, 4 October 2011

यूं ही न कहें आई लव यू

azam khan
अगर आपको लगता है कि आप ‘ आई लव यू ’ कहकर किसी महिला को अपना बना सकते हैं, तो थोड़ा ठहरकर ही अपने प्यार का इजहार कीजिए। हाल में हुई एक रिसर्च से पता चला है कि महिलाएं जल्दी यानी तीन महीने की रिलेशनशिप में प्यार के इजहार करने वाले शख्स पर विश्वास नहीं करती है। इसके विपरीत महिलाएं ऐसे मर्दों के वरीयता देती हैं, जो उनके साथ रिलेशनशिप में काफी समय लेते हैं और फिर अपने प्यार का इजहार करते हैं।
अमेरिका के एक इंस्टिट्यूट द्वारा किए गए इस सर्वे में पूछे गए सवालों के जवाबों से पता चला कि पुरुष, महिलाओं की अपेक्षा 6 हफ्ते जल्दी ही अपने प्यार का इजहार कर देते हैं। सर्वे कहता है कि अमूमन पुरुष 97.3 दिनों में अपने प्यार का इजहार कर देते हैं।
रिसर्चर्स का कहना है कि ऐसा नहीं है कि महिलाएं पुरुषों के इजहार के इंतजार करने के चक्कर में ऐसा पहले खुद नहीं करती है। रिसर्चर्स का कहना है कि ऐसा लगता है कि जल्दी प्यार का इजहार करने के पीछे पुरुषों का मकसद उनकी महिला के साथ सेक्स संबंध डिवेलप करने की तीव्र इच्छा होती है।

Sunday, 2 October 2011

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