Monday, 16 January 2012

जुनून बढ़ता गया जो जो दवा की

जुनून जब हद से गुजरता है, तो जन्म होता है रामानुजन जैसी शख्सियत का। स्कूली शिक्षा भी पूरी न कर पाने के बावजूद वे दुनिया के महानतम गणितज्ञों में शामिल हो गए, तो इसकी एक वजह थी गणित के प्रति उनका पैशन। सुपर-30 के संस्थापक और गणितज्ञ आनंद कुमार की मानें, तो रामानुजन ने गणित के ऐसे फार्मूले दिए, जिसे आज गणित के साथ-साथ टेक्नोलॉजी में भी प्रयोग किया जाता है। उनके फार्मूलों को समझना आसान नहीं है। यदि कोई पूरे स्पष्टीकरण के साथ उनके फार्मूलों को समझ ले, तो कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से उसे पीएचडी की उपाधि आसानी से मिल सकती है।
अंकों से दोस्ती


Ramanujan


22 दिसंबर, 1887 को मद्रास (अब चेन्नई) के छोटे से गांव इरोड में जन्म हुआ था श्रीनिवास रामानुजन का। पिता श्रीनिवास आयंगर कपडे की फैक्ट्री में क्लर्क थे। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, लेकिन बच्चे की अच्छी परवरिश के लिए वे सपरिवार कुंभकोणम शहर आ गए। हाईस्कूल तक रामानुजन सभी विषयों में अच्छे थे। पर गणित उनके लिए एक स्पेशल प्रोजेक्ट की तरह था, जो धीरे-धीरे जुनून की शक्ल ले रहा था। सामान्य से दिखने वाले इस स्टूडेंट को दूसरे विषयों की क्लास बोरिंग लगती। वे जीव विज्ञान और सामाजिक विज्ञान की क्लास में भी गणित के सवाल हल करते रहते।


छिन गई स्कॉलरशिप चमकती आंखों वाले छात्र रामानुजन को अटपटे सवाल पूछने की आदत थी। जैसे विश्व का पहला पुरुष कौन था? पृथ्वी और बादलों के बीच की दूरी कितनी होती है? बेसिर-पैर के लगने वाले सवाल पूछने वाले रामानुजन शरारती बिल्कुल भी नहीं थे। वह सबसे अच्छा व्यवहार करते थे, इसलिए स्कूल में काफी लोकप्रिय भी थे। दसवीं तक स्कूल में अच्छा परफॉर्म करने की वजह से उन्हें स्कॉलरशिप तो मिली, लेकिन अगले ही साल उसे वापस ले लिया गया। कारण यह था कि गणित के अलावा वे बाकी सभी विषयों की अनदेखी करने लगे थे। फेल होने के बाद स्कूल की पढाई रुक गई।


कम नहीं हुआ हौसला अब पढाई जारी रखने का एक ही रास्ता था। वे बच्चों को ट्यूशन पढाने लगे।-प्त8200;इससे उन्हें पांच रुपये महीने में मिल जाते थे। पर गणित का जुनून मुश्किलें बढा रहा था। कुछ समय बाद दोबारा बारहवीं कक्षा की प्राइवेट परीक्षा दी, लेकिन वे एक बार फिर फेल हो गए। देश भी गुलामी की बेडियों में जकडा था और उनके जीवन में भी निराशा थी। ऐसे में दो चीजें हमेशा रहीं-पहला ईश्वर पर अटूट विश्वास और दूसरा गणित का जुनून। नौकरी की जद्दोजहद शादी के बाद परिवार का खर्च चलाने के लिए वे नौकरी की तलाश में जुट गए। पर बारहवीं फेल होने की वजह से उन्हें नौकरी नहीं मिली। उनका स्वास्थ्य भी गिरता जा रहा था। बीमार हालात में जब भी किसी से मिलते थे, तो उसे अपना एक रजिस्टर दिखाते। इस रजिस्टर में उनके द्वारा गणित में किए गए सारे कार्य होते थे।


किसी के कहने पर रामानुजन श्री वी. रामास्वामी अय्यर से मिले। अय्यर गणित के बहुत बडे विद्वान थे। यहां पर श्री अय्यर ने रामानुजन की प्रतिभा को पहचाना और उनके लिए 25 रुपये मासिक छात्रवृत्ति का प्रबंध भी कर दिया। मद्रास पोर्ट ट्रस्ट में भी क्लर्क की नौकरी भी मिल गई। यहां काम का बोझ ज्यादा न होने के कारण उन्हें गणित के लिए भी समय मिल जाता था। बोलता था जुनून रात भर जागकर वे गणित के नए-नए सूत्र तैयार करते थे। शोधों को स्लेट पर लिखते थे। रात को स्लेट पर चॉक घिसने की आवाज के कारण परिवार के अन्य सदस्यों की नींद चौपट हो जाती, पर आधी रात को सोते से जागकर स्लेट पर गणित के सूत्र लिखने का सिलसिला रुकने के बजाय और तेज होता गया। इसी दौरान वे इंडियन मैथमेटिकल सोसायटी के

गणितज्ञों संपर्क में आए और एक गणितज्ञ के रूप में उन्हें पहचान मिलने लगी।

सौ में से सौ अंक ज्यादातर गणितज्ञ उनके सूत्रों से चकित तो थे, लेकिन वे उन्हें समझ नहीं पाते थे। पर तत्कालीन विश्वप्रसिद्ध गणितज्ञ जी. एच. हार्डी ने जैसे ही रामानुजन के कार्य को देखा, वे तुरंत उनकी प्रतिभा पहचान गए। यहां से रामानुजन के जीवन में एक नए युग का सूत्रपात हुआ। हार्डी ने उस समय के विभिन्न प्रतिभाशाली व्यक्तियों को 100 के पैमाने पर आंका था। अधिकांश गणितज्ञों को उन्होने 100 में 35 अंक दिए और कुछ विशिष्ट व्यक्तियों को 60 अंक दिए। लेकिन उन्होंने रामानुजन को 100 में पूरे 100 अंक दिए थे। उन्होंने रामानुजन को कैंब्रिज आने के लिए आमंत्रित किया। प्रोफेसर हार्डी के प्रयासों से रामानुजन को कैंब्रिज जाने के लिए आर्थिक सहायता भी मिल गई। अपने एक विशेष शोध के कारण उन्हें कैंब्रिज विश्वविद्यालय द्वारा बी.ए. की उपाधि भी मिली, लेकिन वहां की जलवायु और रहन-सहन में वे ढल नहीं पाए। उनका स्वास्थ्य और खराब हो गया।
 
 

अंतिम सांस तक गणित उनकी प्रसिद्घि बढने लगी थी। उन्हें रॉयल सोसायटी का फेलो नामित किया गया। ऐसे समय में जब भारत गुलामी में जी रहा था, तब एक अश्वेत व्यक्ति को रॉयल सोसायटी की सदस्यता मिलना बहुत बडी बात थी। और तो और, रॉयल सोसायटी के पूरे इतिहास में इनसे कम आयु का कोई सदस्य आज तक नहीं हुआ है। रॉयल सोसायटी की सदस्यता के बाद वह ट्रिनिटी कॉलेज की फेलोशिप पाने वाले पहले भारतीय भी बने। करना बहुत कुछ था, लेकिन स्वास्थ्य ने साथ देने से इनकार कर दिया। डॉक्टरों की सलाह पर भारत लौटे। बीमार हालात में ही उच्चस्तरीय शोध-पत्र लिखा। मौत की घडी की टिकटिकी तेज होती गई। और वह घडी भी आ गई, जब 26 अप्रैल, 1920 की सुबह हमेशा के लिए सो गए और शामिल हो गए गौस, यूलर, जैकोबी जैसे सर्वकालीन महानतम गणितज्ञों की पंक्ति में।



Sunday, 15 January 2012

आने वाले वर्षा में 22 करोड़ सस्ते टैबलेट लैपटॉप की जरूरत


शिक्षा को सूचना, संचार प्रौद्योगिकी से जोड़ने की कवायद के तहत सरकार को आने वाले वर्षाे में 22 करोड़ सस्ते टैबलेट लैपटॉप (आकाश) की जरूरत है। इन जरुरतों को पूरा करने के लिए निविदा प्रक्रिया की तैयार चल रही है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एन के सिन्हा ने कहा कि प्रारंभ में जमीनी परीक्षण के लिए एक लाख (आकाश) बनाने का निर्णय किया गया था, लेकिन इससे मकसद हल नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा कि मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने आने वाले वर्षाे में 22 करोड़ आकाश की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि इतनी संख्या में आकाश के निर्माण के लिए नए सिरे से निविदा जारी की जाएगी और डाटाविंड (आकाश का निर्माण करने वाली कंपनी) के अलावा अन्य को भी मौका मिलेगा।



अतिरिक्त सचिव ने कहा, ‘निविदा प्रक्रिया की तैयारी चल रही है।’ कुछ बड़ी कंपनिया इसे 44 हजार करोड़ रुपये के कारोबारी अवसर तो कुछ इसे अपने कारोबार के मार्ग में बाधा के रूप में देख रही हैं। आकाश की गुणवत्ता के बारे में सामने आ रही शिकायतों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इस सस्ते टैबलेट लैपटाप की बैटरी, प्रोसेसर और आर्किटेक्चर के संबंध में शिकायत प्राप्त हुई थी। 

इसमें सुधार कर दिया गया है। बैटरी की क्षमता में जहा डेढ गुणी वृद्धि की गई है, वहीं प्रोसेसर को 366 मेगा हर्ट्ज से बढ़ाकर 700 मेगा हर्ट्ज कर दिया गया है। इसके आर्किटेक्चर को भी बेहतर बनाया गया है जबकि कीमत 2,276 रुपये ही रखी गई है। उन्नत आकाश की क्षमता में पहले की तुलना में तीन गुणा वृद्धि की गई है, साथ ही इसपर यू ट्यूब से भी डाउनलोड किया जा सकता है। इसकी मेमोरी क्षमता में भी वृद्धि की गई है। आकाश के बारे में आ रही शिकायतों के बारे में हालाकि एक वर्ग का मानना है कि यह कुछ बड़ी कंपनियों की साजिश का परिणाम हो सकता है।

परियोजना से जुड़े एक वर्ग का कहना है कि कुछ कंपनिया चाहती हैं कि यह परियोजना बंद हो जाए, ताकि उनका धधा सुचारू रूप से चलता रहे, जबकि कुछ कंपनिया इसे 44 हजार करोड़ रुपये के कारोबारी अवसर के रूप में देख रही है। हालाकि एक ऐसा वर्ग भी है जो चाहता कि आकाश की कीमत 2,276 रुपये ही रहे और समय के साथ इसकी गुणवत्ता में वृद्धि की जाए। मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि अमेरिका, पनामा, इक्वाडोर समेत कई अफ्रीकी देशों से आकाश की माग आई है।

डाटाविंड की ओर से आकाश की बिक्री किए जाने के बारे पूछे जाने पर अधिकारी ने कहा कि कंपनी आकाश के नाम से टैबलेट नहीं बेच सकती है, लेकिन अन्य प्रारूप को बेच सकती है। इस परियोजना के लिए जितनी अधिक संख्या में कंपनिया आएंगी, वह उतच अच्छा होगा। तमाम झझावतों से गुजरते हुए छात्रों के लिए सस्ता लैपटाप मुहैया कराने की सरकार की परिकल्पना को मुकाम तक पहुंचने में छह वर्ष लग गए ,जब पिछले वर्ष 2,276 रुपये कीमत की आकाश पेश किया गया। सरकार इस पर 50 प्रतिशत की सब्सिडी प्रदान करेगी और अभी यह छात्रों को करीब 1,100 रुपये में उपलब्ध हो रहा है।

इस उपकरण को मानव संसाधन विकास मंत्रालय की राष्ट्रीय स्कूली शिक्षा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी नीति (एनएसईआईसीटी) और आईआईटी राजस्थान के सहयोग से तैयार किया गया है जिसका निर्माण ‘डाटाविंड’ नामक कंपनी ने किया है। इसी परियोजना को फरवरी 2009 में हरी झडी दिखाई गई थी और इस उद्देश्य के लिए 4,612 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था। 

प्रारंभ में इस परियोजना के तहत 10 डालर में छात्रों के लिए लैपटाप तैयार करने की योजना बनाई गई थी जो बाद में 35 डालर रखी गई ,हालाकि वर्तमान में इसकी लागत 49 डालर आई है। सात इंच के इस टच स्क्रीन टैबलेट लैपटाप में हार्ड डिस्क तो नहीं है लेकिन लिनक्स आधारित इस उपकरण को 32 जीबी के बाहरी हार्ड ड्राइव से जोड़ा जा सकता है।च् मैसेच्यूसेट्य इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी ख्एमआईटी, के 100 डालर की लैपटाप परियोजना की तर्ज पर मानव संसाधन मंत्रालय ने 2005 में इस योजना की परिकल्पना की थी।

Mukarram Khan
इस टच स्क्रीन लैपटाप में दो यूएसबी का पोर्ट है और इसकी बैटरी में तीन घटे कार्य करने की क्षमता है। यह लैपटाप सौर ऊर्जा के उपयोग से भी चल सकता है। इस उपकरण में वर्ड, एक्सेल, पावर प्वायंट, पीडीएफ, ओपेन आफिस, वेब ब्राउजर और जावा स्क्रीप्ट भी संलग्न है। इसमें जिप-अनजिप तथा वीडियो स्ट्रीमिंग सुविधा भी है। इंटरनेट सुविधा से लैस इस उपकरण में मीडिया प्लेयर, वीडियो काफ्रेंसिंग और मल्टी मीडिया कंटेन्ट सुविधा उपलब्ध है। यह लैपटाप कठिन परिस्थितियों में भी काम कर सकता है।


                                                                  

Friday, 13 January 2012

दुनिया की सबसे बड़ी मिस्ट्री प्यार

आखिर प्यार क्या है जो इसे दुनिया की सबसे बड़ी मिस्ट्री माना गया है। अपने प्रेमी के लिए ललक ऐसी चीज है, जिसने वैज्ञानिकों को भी लम्बे वक्त तक हैरान किया है। प्यार करने वालों के बीच इस पागलपन का कारण जानने के लिए जाने कितनी खोजें हुई। अगर उन खोजों पर यकीन करें तो दो प्रेमियों की इमोशंस और उनके चेंज होने के पीछे जो असली कारण है, वह है शरीर में होने वाला केमिकल लोचा।


वैज्ञानिकों के अनुसार प्यार की अलग-अलग स्टेजेस जैसे इन्फैचुएशन, कडलिंग, अट्रैक्शन यहां तक कि बिट्रेयल के पीछे भी काम करते हैं कुछ खास केमिकल्स।
वैज्ञानिक मानते हैं कि आकर्षण असल में इन न्यूरोकेमिकल्स के वर्चुअल एक्सप्लोजन जैसा है। जिसके बाद आपको फील गुड होने लगता है। पीईए, एक केमिकल है जो नर्व सेल्स के बीच इन्फॉर्मेशन का फ्लो बढ़ा देता है। इस केमिस्ट्री में डोपामाइन और नोरिफिनेराइन नामक दो केमिकल्स भी बड़ा इंट्रेस्टिंग काम करते हैं। डोपामाइन हमें फील गुड का अहसास कराता है और नोरिफिनेराइन एड्रिनैलिन का प्रोडक्शन बढ़ा देता है। किसी को देखकर बढ़ने वाली हार्ट बीट इन कैमिकल्स की ही देन है, जिसे प्रेमी कुछ कुछ होना समझ बैठते हैं। ये तीनों कैमिकल्स कम्बाइन होकर काम करते हैं। इन्फैचुएशन जिसे इन जनरल लोग आपकी श्केमिस्ट्रीश् कहते हैं। यही कारण है कि नए प्रेमी खुद को हवा में उड़ता हुआ, बेहद ऊर्जावान सा फील करते हैं।
Gazala Khan

किसी के साथ कडल अप करने का मन बस यूं ही नहीं होता। इसके पीछे भी एक केमिकल है जनाब! ये है ऑक्सिटोसिन, जिसे कडलिंग केमिकल भी कहा गया है। वैसे तो ऑक्सिटोसिन को मदरहुड से भी संबंध किया जाता है लेकिन ये भी माना जाता है कि ये महिला और पुरूष दोनों को ज्यादा कूल और दूसरों की फीलिंग्स के लिए सेंसिटिव बनाता है। सेक्सुअल अराउजल में भी इसका खास रोल है। ऑक्सिटोसिन प्रोडक्शन ट्रिगर करने के पीछे इमोशनल रीजंस भी हो सकते हैं और फिजिकल भी। यानी अपने लवर की फोटो देखने, उसके बारे में सोचने से लेकर उसकी आवाज सुनने, उसके किसी खास अपीयरेंस तक कुछ भी आपकी बॉडी में ऑक्सिटोसिन का प्रोडक्शन बढ़ा सकता है। अगर प्रेमी फिजिकली प्रेजेंट हैं तो यही हार्माेन एक-दूसरे को गले लगाने और कडल करने के लिए उकसाता है।
इन्फैचुएशन कम होते ही केमिकल्स का एक नया ग्रुप टेकओवर कर लेता है। इसे क्रिएट करते हैं एन्डॉर्फिन्स। ये केमिकल्स पीईए जैसे एक्साइटिंग नहीं होते लेकिन ज्यादा एडिक्टिव और कूल करने वाले होते हैं। यही कारण है कि इन्फैचुएशन के बाद प्यार की अगली स्टेज यानी अटैचमेंट में इंटिमेसी के साथ-साथ ट्रस्ट, वॉर्म्थ और साथ वक्त बिताने जैसी इमोशंस फील की जाती हैं। जितना ज्यादा लोग इन केमिकल्स के आदी हो जाएं वो उतना ही इनसे दूर नहीं रह सकते। यही कारण है कि लम्बे चलने वाले लव अफेयर्स या कोई खास रिश्ता टूटना आप बर्दाश्त नहीं कर पाते। इसके पीछे रीजन है इन केमिकल्स का लत लगना। अपने पार्टनर के दूर जाने पर उसे मिस करने के पीछे भी यही एंडॉर्फिन्स होते हैं।
प्रेमी के दूर जाने पर ये केमिकल्स बॉडी में कम होने लगते हैं और इनके आदी होने की वजह से आप अपने प्रेमी, या विज्ञान की भाषा में कहें तो इन हारमोन्स की कमी महसूस करने लगते हैं।
                                                                                                                            



Wednesday, 11 January 2012

ये है 106 साल पुरानी मोटर बाइक

 भले ही इस बाइक पर अब सवारी नहीं की जा सके, लेकिन यह गुजरे जमाने की रोमानियत और तकनीक का अहसास देती है। 106 साल पुरानी यह इंडियन मोटर बाइक नीलाम होने जा रही है। दो दिन बाद करीब 50 हजार पौंड में इसके नीलाम होने के बारे में कयास लगाए जा रहे हैं। सिंगल सिलेंडर 311 सीसी फोर स्ट्रोक पेट्रोल इंजन वाली इस तरह की 1,698 बाइक उस साल बनाई गई थी। इस बाइक को बनाने की वाली कंपनी 1953 में दिवालिया हो गई थी और इस तरह की चुनिंदा बाइक 1970 के बाद शो-पीस के रूप में अपने पूर्वजों के अवशेष के रूप में बची हुई हैं।


GAZALA KHAN

डार्लिग हैप्पी न्यू ईयर!

31 दिसंबर की रात को मैं पुराने साल का बखेडा समेट कर रात 9 बजे ही चैन की नींद सो गया था। अचानक पत्नी ने झिंझोड कर मुझे जगाया और मैं घबराया सा उठकर बैठ गया। नींद में घडी देखी तो आधी रात के बारह बज रहे थे। मैंने पत्नी से कहा, भागवान क्या बात है? मैं तो वैसे ही चिंताओं की वजह से नींद की गोली लेकर सोता हूं और तुमने आधी रात में ही जगा दिया है, आखिर मामला क्या है?

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पत्नी बोली, आपको कुछ याद भी रहता है या हमेशा नींद में ही रहते हो। नया साल आ गया है और मैं आपको नववर्ष की ढेर सारी शुभकामनाएं देती हूं, हैप्पी न्यू ईयर डार्लिग। नींद से जागो एक जनवरी आ गई है।
मैं बोला, तुमने मुझे हैप्पी न्यू ईयर के लिए जगा दिया, यह काम तो सुबह सात बजे भी हो सकता था। इसके लिए मुझ सोते हुए को जगाने की क्या आवश्यकता थी? तुम जानती हो, मेरी तबीयत वैसे ही ठीक नहीं रहती। खैर सेम टु यू। अब मैं सो जाऊं?
अरे यह आपने सोना-सोना क्या लगा रखा है! पूरी कॉलोनी ही नहीं, पूरा शहर जाग गया है। कल दिन के प्रोग्राम्स को फाइनल टच दिया जा रहा है। हम भी तो कल एंजॉय करेंगे। बताओ कैसे क्या करें?
मैंने कहा, देखो प्रिये, यह नया साल अंग्रेजों का और पश्चिम का है। हमारा नया साल तो मधुमास के बाद आएगा। इसलिए हम तब इसे धूमधाम से मनाएंगे। अभी तो हम आराम से सोते हैं। मैंने पत्नी को टालना चाहा। लेकिन उसके सिर पर न्यू ईयर का भूत सवार था। वह थोडा तैश में बोली, कमाल करते हैं आप। किस नए साल की बात कर रहे हो? नया साल तो आ चुका है। पूरे साल में एक बार आता है, उस पर भी बैकफुट हो रहे हैं! अरे इसका दिल खोलकर स्वागत करिए। उल्लास और उमंग भर लीजिए अपने भीतर। कल हम मॉल चलेंगे, शापिंग करेंगे, घूमेंगे-फिरेंगे, ऐश करेंगे और क्या?
पत्नी की बात सुनकर मेरी नींद पूरी तरह चली गई। मैं घबरा सा गया। उसकी शॉपिंग का मतलब मैं खूब अच्छी तरह जानता हूं। शॉपिंग का सीधा-सा अर्थ है दस-बीस हजार रुपयों से हाथ धोना। मैं धीरे से बोला, लेकिन अभी तो सेलरी भी नहीं मिली है। कल सेलरी के चांसेज हैं नहीं। तुम्हारा यह न्यू ईयर बिना सेलरी के क्या कर लेगा?
अरे क्या सेलरी का रोना लेकर बैठ गए। गुप्ता जी ने कभी आपको उधार के लिए मना किया है क्या? जाना और ले आना। हम उनका उधार चुका देंगे। चलो अब सो जाओ, पत्नी यह कह कर लिहाफ तानकर खर्राटे भरने लगी और मेरी आंखों से नींद पता नहीं कहां चली गई। सोचने लगा, कल क्या होगा। इस महंगाई में जब घर चलाना मुश्किल हो गया है, यह नया साल क्या करेगा। रुपया वैसे ही लुढक गया है, बाजार में उसकी कीमत न के बराबर रह गई है। दाल-रोटी खाना कठिन होता जा रहा है। रोज पेट्रोल और रसोई गैस के दाम बढ जाते हैं, जिससे बाजार लगातार महंगा होता जा रहा है। कोई तरकारी साठ रुपये किलो से कम नहीं है, दालें पहले से ही महंगी चली आ रही हैं, गुप्ता जी से पैसा ले भी आया तो चुकाऊंगा कहां से? इस आमदनी में तो रोटी, कपडा और मकान का सलटारा नहीं हो रहा है। ऋण पहले ही क्या कम ले रखे हैं! होम लोन खा गए, पूरा पी.एफ. चट कर गए और मित्रों से उधार ले रखा है, उसकी गिनती डायरी याद दिलाती है। यह नए साल का लफडा तो जीना मुहाल कर देगा। दोनों बच्चों की स्कूल फीस अलग से इसी महीने में ही देनी है। यह उत्साह और उमंग तक तो बात समझ में आती है, लेकिन धूमधाम से इसे मनाना तो उडता तीर लेना है।
इसी ऊहापोह में मेरी पता नहीं फिर कब आंख लग गई। पत्नी चाय लेकर आ गई तब उठा तो आठ बज रहे थे। पत्नी को देखते ही मेरे भीतर बारह बज गए।
पत्नी फिर बोली, हैप्पी न्यू ईयर डार्लिग, लो गर्मा-गर्म चाय पिओ और नहा-धोकर गुप्ता जी को पकडो। वे निकल गए तो सारा न्यू ईयर चौपट हो जाएगा और हमारा पूरा नया साल मुफलिसी में गुजरेगा। गुप्ता जी का नाम सुनते ही मेरी सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई और मैं फिर विचार मग्न हो गया। गुप्ता क्या कम चालू है, पहले का उधार मांगेगा और नए उधार पर ब्याज की रेट अलग से बढा देगा। पत्नी ने ही तंद्रा तोडी, अरे इस पहली जनवरी को क्या मनहूस शक्ल बना ली। लो चाय तो पी लो। चाय का कप लेते हुए मेरे हाथ कांप रहे थे। कडवी दवा की तरह मीठी चाय पी और नहा-धोकर स्कूटर लेकर गुप्ता जी के घर की ओर लपका। गुप्ता जी घर पर ही थे। मुझे देखते ही बोले, हैप्पी न्यू ईयर सरमा, कहो कैसे हो? आज सुबह-सुबह ही कैसे हांफ रहे हो?
हांफने की वजह यह न्यू ईयर ही है गुप्ता जी। पत्नी ने इसे धूमधाम से मनाने का निश्चय किया है और मैं बिना सेलरी के क्या खाकर मनाऊं? इसलिए मन मारकर आपकी शरण में आना पडा है। दस हजार उधार दे दो तो काम बन जाए। शॉपिंग भी करनी है और लंच भी बढिया रेस्तरां में लेना है। क्या करूं, पत्नी की जिद के आगे कुछ किया भी तो नहीं जा सकता।
वह तो कोई बात नहीं, एक तो आपकी पहले की मासिक किस्तें नियमित नहीं हैं, दूसरा महंगाई के साथ-साथ मैंने अपनी ब्याज दर नए साल से पांच रुपये सैकडा कर दी है। पैसे तो पडे हैं, ले जाओ। भाई न्यू ईयर पर तुम्हें क्या मना करूं? पत्नी और बच्चों को ऐश कराओ। बोलो मेरा ब्याज दे पाओगे?
लेकिन यह पांच प्रतिशत तो बहुत ज्यादा है सर! दो से एकदम पांच, बहुत अधिक नहीं है? मैंने कहा तो गुप्ता जी बोले, तो छोडो सरमा, नया साल मनाना डॉक्टर ने थोडे ही बताया है। भीतर उत्साह और उमंग भर लो। मुफ्त की चीज है, कोई ब्याज नहीं लगेगा। वैसे भी जमाने की देखा-देखी में रखा क्या है?
मुझे लगा खाली हाथ गया तो फिर कहां जाऊंगा। पत्नी की खुशियों को लगे परों का क्या होगा? बच्चों को भी एंजॉय करना है। घर की ऊंच-नीच सोचकर मैं बोला, चलो लाओ, करूंगा कुछ। गुप्ता जी प्रत्युत्तर में बोले, देखो सरमा, इस तरह कब तक घर चलाओगे? हो सके तो इस महंगाई को काबू करने के लिए अपनी इनकम बढाओ।
इनकम क्या बढाओ? मिलती तो कोरी सेलरी ही है। ऊपर की जो कमाई थी, वह अन्ना आंदोलन के बाद से ठप्प हो गई है। लोग ठसके से आते हैं और मुफ्त में काम करा ले जाते हैं। फिर थोडा मैंने भी अपने आप को अमेंड कर लिया है कि देश के लिए और कुछ नहीं तो भ्रष्टाचार करना तो त्यागो। इससे रह जाता है उधार, अभी तो आप दो, मैं पत्नी को भी समझाने की कोशिश करूंगा कि इस तरह तो हम डूब जाएंगे। कहीं के नहीं रहेंगे।
गुप्ता जी बोले, घर की बात तो यही है सरमा। जितनी चादर हो उतना ही पांव पसारो। अभी जीवन बहुत लंबा है। इस दिखावे में क्या धरा है? सबको कांग्रेच्यूलेट करो और डे सेलिब्रेट करो। आप ठीक कह रहे हैं गुप्ता जी। आप पैसे रहने दें, मैं घर में ही मनाऊंगा यह न्यू ईयर। यह कहकर मैं उत्साह और उमंग के साथ हंसमुख चेहरा लेकर घर में घुसा तो पत्नी की बांछें खिल गई। वह बोली, मिल गए गुप्ता जी?
अरे भागवान गुप्ता जी तो मिल गए, लेकिन मैं उनसे उधार लाया नहीं। हम लोग न्यू ईयर घर में ही मनाएंगे। मेरा मतलब न तो शॉपिंग होगी और न ही किसी रेस्टोरेंट में लंच-डिनर। हम बच्चों के साथ घर में ही आनंद करेंगे। जितनी बडी चादर हो पांव उतने ही फैलाने चाहिए। उधार लेकर न्यू ईयर मनाना किसने बताया है और मैं तो यह कहता हूं कि पैसा अपने खुद के पास भी हो तो उसकी बदखर्ची नहीं करनी चाहिए। थोडी बचत करना जरूरी है। पता नहीं कब क्या काम पड जाए। ऋण पहले ही कम नहीं है। इसलिए मैं नहीं लाया पैसा। हम घर में ही नई डिश बनाएंगे और मनाएंगे न्यू ईयर। इस महंगाई में कोहनी मुंह में वैसे ही नहीं आती। इसलिए अपने बूते पर जो हो जाए, वही करो।
श्रीमती भी मेरी बात सुनकर चुप हो गई और फिर बोलीं, आप सच कह रहे हैं। ऋणं कृत्वा घृतं पिबेत का फलसफा बहुत दिन नहीं चल सकता। हम खुशी से अपने घर में ही न्यू ईयर मनाएंगे। मैंने पत्नी को बांहों में भरकर कहा, आज पहली दफा घर में नया साल आया है। साल आता है, चला जाता है, लेकिन दिन-दिन जटिल होती जिंदगी को इस तरह नहीं ढोया जा सकता।

Gazala Khan

घर में पहली जनवरी को ऐसी खुशी समाई कि मैं फूला नहीं समा रहा था। मैंने रसोई में काम कर रही पत्नी के कान में हंसते हुए कहा, हैप्पी न्यू ईयर डार्लिग।
पत्नी ने भी हंसकर मुझे सेम टु यू कहा और खिलखिलाकर हंस पडी।


Thursday, 5 January 2012

तेरी याद बाकी


उसको आती है मेरी याद
मगर देर से आती है
हमको तो उसकी याद
हर पल ही सताती है
वो आके ये कहते हैं
कि फुरस्त न मिली हमको
उल्फत में तो फुरस्त उल्फत
ही दिलाती है
बेचौन से रहतें हैं हम
उसकी जुदाई में
क्या उसको हमारी याद
बिल्कुल न तड़पाती है
आंखे लगी रहती हैं
हरदम हर एक आहट पर
एक वों हैं कि वादा
कभी न निभाती हैं

                                                                                                         गजाला खान