Sunday, 28 August 2011

अग्निवेश ने दिया अन्ना को सबसे बड़ा धोका ?


GAZALA KHAN
प्रस्तुत कर्ता
जनलोकपाल के लिए संघर्ष कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे का अनशन भले ही खत्म हो गया और संसद ने उनकी मांगें मानते हुए प्रस्ताव पेश कर दिया है। लेकिन अन्ना के इस आंदोलन में रुकावट डालने की साजिश की खबर आ रही है। विभिन्न चैनलों पर चल रही खबर और यूट्यूब पर अपलोड एक वीडियो के मुताबिक अन्ना के अनशन के दौरान टीम अन्ना के सदस्य माने जा रहे स्वामी अग्निवेश ने कथित तौर पर सरकार के एक मंत्री से फोन पर बात की और अन्ना के बारे में अनाप शनाप टिप्पणी की।
<iframe width="420" height="345" src="https://www.youtube.com/embed/x8plWkPwdiQ?rel=0" frameborder="0" allowfullscreen></iframe>
सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर मशहूर स्वामी अग्निवेश की इस बातचीत का वीडियो रिकार्ड किया है ‘जनतंत्र डॉट कॉम’ ने जिसे यू ट्यूब पर लोड किया गया है। इस बातचीत के दौरान इस लाइन को लेकर शक की सुई अग्निवेश की तरफ घूमती है जिसमें अग्निवेश को मोबाइल पर किसी से यह कहते हुए दिखाया गया है, ‘बहुत जरूरी है कपिल जी, नहीं तो ये पागल होते जा रहे हैं जैसे हाथी।’

इसमें अग्निवेश एक जगह यह कहते दिखाई देते हैं, ‘‘...पूरी पार्लियामेंट ने जब खड़े होकर अनशन तोड़ने की अपील की तो अन्ना को तभी अनशन तोड़ देना था।’’ इस वीडियो में सुनाई दे रही आवाज के मुताबिक अग्निवेश कहते हैं कि वे बहुत शर्मिंदा हैं कि केंद्र सरकार आखिर इतनी कमजोर क्यों दिखाई पड़ रही है। यही नहीं, अग्निवेश बातचीत के दौरान कपिल को इशारे से यह भी सलाह दे रहे हैं कि केंद्र सरकार अन्ना के आगे कतई झुके नहीं।

गौरतलब है कि हाल में स्वामी अग्निवेश ने अन्ना के अनशन को लेकर नाराजगी जताई थी और कहा था कि वह आमरण अनशन के खिलाफ हैं।

http://www.visharadtimes.com/

Saturday, 27 August 2011

अगर आप हैं भ्रष्ट, तो एलियन करेंगे नष्ट!

MOHD SALEEM
वैज्ञानिकों ने मनुष्यों को चेतावनी दी है कि वे अपना आचरण सुधार लें। अपने आस-पास के पर्यावरण के प्रति संवेदनशील हों और अपनी पृथ्वी से प्रेम करें। यदि ऐसा नहीं किया, तो संभव है कि दूसरी दुनिया में रहने वाले बुद्धिमान प्राणी एलियन, जब यहां आएं, तो मनुष्यों को नष्ट कर दें। नासा और पेंसिलवेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने अपनी एक रिपोर्ट में यह चेतावनी दी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बुद्धिमान एलियनों को यह बात समझने में जरा देर नहीं लगेगी कि मनुष्यों ने अपने भ्रष्ट आचरण से किस प्रकार पृथ्वी का दोहन किया और उसके पर्यावरण को नष्ट किया। ऐसे में वे दूसरे ग्रह अथवा अंतरिक्ष के पर्यावरण के मनुष्य के हाथों नष्ट होने की आशंका से पूरी मनुष्य जाति को खत्म कर सकते हैं। नासा की इस रिपोर्ट पर अमेरिकी रक्षा विभाग गंभीर है। इसीलिए वह नासा के साथ मिल कर एक परियोजना पर काम कर रहा है, जिसका नाम है श्100 ईयर स्टारशिप स्टडीश्। इसके तहत वह पृथ्वी से संचार उपकरणों ख्और संभव हुआ तो जीवित प्राणियों, को दूसरे तारा मंडलों में भेजने की तैयारी कर रहा है। अमेरिका की डिफेंस एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी डीएआरपीए, भी जीवन वाले दूसरे ग्रहों या एलियन की खोज में इस साल के अंत तक एक योजना पर काम शुरू करने जा रही है। नासा और यूनिवर्सिटी की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता कि एलियन का व्यवहार कैसा होगा। वे सहयोगी प्राणी हो सकते हैं। स्वार्थी हो सकते हैं। हमलावर हो सकते हैं। वे हमें गुलाम बना सकते हैं। हमें खा सकते हैं। यह भी संभव है कि वे हमसे कोई संवाद न करें। विभिन्न परिकल्पनाओं के बीच रिपोर्ट में यह भी आशंका व्यक्त की गई है कि एलियन अत्यधिक बुद्धिमान, शक्तिशाली और प्रकृति के प्रति संवेदनशील हों। यही कारण है कि हमें उनकी नाराजगी से बचने के लिए पृथ्वी की सही ढंग से देखभाल करना चाहिए। एलियन मनुष्यों का आकलन इस आधार पर भी कर सकते हैं कि हमने पृथ्वी और पर्यावरण के साथ कैसा बर्ताव किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि अब भी देर नहीं हुई है। अपने आचरण को सुधार कर हम अपने आप को एलियन से भी बचा सकते हैं और अपनी पृथ्वी को अपने गैरजिम्मेदाराना बर्ताव से भी।

http://www.visharadtimes.com/

अमेरिका के खाद्य एवं औषधि प्रशासन

अमेरिका के खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने फेफड़ों के कैंसर से बचाव करने और ट्यूमर को बढ़ने से रोकने वाली दवा को मंजूरी दे दी है। दवा कंपनी फाइजर द्वारा निर्मित 'जालकोरी' नामक यह गोली कैंसर पीड़ितों के शरीर में इस बीमारी के लिए जिम्मेदार जीन पर हमला कर उपचार करती है।
इससे उन कैंसर मरीजों का इलाज संभव होगा जिनके शरीर में यह असाधारण जीन होता है, जिससे कैंसर कोशिकाएं बढ़कर ट्यूमर का रूप ले लेती हैं।
याले विश्वविद्यालय में कैंसर चिकित्सा विभाग के प्रमुख डा. रॉय हब्‌र्स्ट ने बताया, 'अब ऐसी थेरेपी विकसित हो चुकी हैं जो कीमोथेरेपी से भी बेहतर है और ट्यूमर को खत्म करने में सहायक सिद्ध हो सकती है। यह दवा उस जीन द्वारा पैदा किए जाने वाले घातक प्रोटीन का उत्पादन बंद करके कैंसर को बढ़ने से रोकती है।'खाद्य एवं औषधि प्रशासन [एफडीए] का कहना है कि करीब तीन चौथाई रोगियों की जांच ट्यूमर विकसित होने के बाद हो पाती है। इनमें से मात्र छह प्रतिशत लोग पांच साल तक जीवित रह पाते हैं। पिछले हफ्ते एफडीए ने एक और ऐसी दवा को मंजूरी दी थी जो जीन में परिवर्तन कर कैंसर का इलाज करती है।


Friday, 26 August 2011

कभी देखा है ऐसा मुर्गा

बीजिंग में यहां का एक मुर्गा लोगों के बीच सेलेब्रिटी बन चुका है। इसकी तस्वीर लेने वालों का तांता लगा हुआ है। दरअसल पांच महीने के इस मुर्गे के शरीर पर पंख नहीं हैं। मुर्गे के मालिक का कहना है कि इसके पैदा होने के दस दिन बाद मुझे महसूस हुआ कि यह अपने बाकी साथियों से अलग है। दूसरों के मुकाबले इसके शरीर पर रोयें नहीं थे। बाद में भी ये रोयें विकसित नहीं हुए। इसी तरह इसका वजन भी जन्म से ही काफी कम है। जहां इसके अन्य साथियों का वजन दो से तीन किलो है वहीं यह आधे किलो से भी कम भार का है।

Tuesday, 23 August 2011

जानिए क्या होता है वाई फाई

वाई फाई जिसे वायरलेस फिडेलिटी भी कहते हैं एक वायरलेस नेटवर्किंग सुविधा है, वाई फाई का एक सीमित क्षेत्र होता है वाई फाई के जरिए हम अपने लैपटॉप,मोबाइल, आईपॉड इत्यादि को बिना केबल के इंटनेट से जोड़ सकते हैं वाई फाई के जरिए किसी भी किसी भी तार की जरुरत नहीं होती है।
उदाहरण के लिए भारत में कई ऑफिस, मॉल या एयरपोर्ट वाईफाई सुविधा से युक्त हैं जहां आप अपना लैपटॉप चलाकर उसमें बिना इंटरनेट का तार जोड़े वाई फाई की सुविधा का मजा उठा सकते हैं इसमें बिना किसी इंटरनेट केबल के आप नेट से कनेक्ट होकर ईमेल, चेटिंग तथा सर्फिंग कर सकते है। भारत में पुणे पहला ऐसा शहर है जो पूरी तरह वाई फाई युक्त है।

http://www.visharadtimes.com/

हम क्या, हमारा क्या?

रावण बहुत बड़ा ज्ञानी था। उसने कड़े तप किए थे। पराक्रमी भी था, लेकिन जो उसे ले डूबा, वह था उसका घमंड। यह बातें हमने बचपन से सुनी हैं।
आजकल व्यक्तित्व निखार के सबक का हिस्सा खुद पर नाज करना सिखाने का भी है। नाज और घमंड में कितना अंतर है, यह जानना रोचक हो सकता है।
पिछले दिनों एक मालिक मकान को अपने किराएदार से कहते सुना कि हमने आपको रहने के लिए घर दिया। इसे आप क्या कहेंगे, नाज या घमंड? कोई किसी को ऐसा क्या दे सकता है, जिस पर अधिकार से कह सके कि मैंने दिया? याचक तो हम सब हैं। अगर नहीं, तो इंकार कर दें कि किसी की दी हवा में सांस नहीं लेंगे, किसी की धरती पर कदम नहीं रखेंगे, किसी और का बरसाया पानी नहीं ग्रहण करेंगे। सब खुद रचें और फिर इस्तेमाल करें।
या हो सके, तो जो अब तक इस्तेमाल कर लिया है पीढ़ियों दर पीढ़ी, उसका मोल चुका दें और फिर कहें कि हम किसी के देनदार नहीं। वह आसमान का टुकड़ा हमारा है, जिसके नीचे बसी धरती पर हमने हवा पर घर बनाया है।
नाज शब्द को जब प्राइड से जोड़ा जाता है, तब भी समझने की बात यह है कि इसमें अपने किए या पाए पर इठलाने का मुद्दा नहीं है। व्यक्तित्व निखार के जरिए, जिस प्राइड या नाज की बात की जाती है, वह घमंड से कोसों दूर है। जो आप कर रहे हैं, उस पर, अपनी मेहनत पर और उसके नतीजों में मिले इत्मीनान को स्वीकार करने या महसूस करने का ही अर्थ है यहां। नतीजे ठीक न मिले हों, तो कमतर न समझें। बस, इतना ही।
नाज खुद पर किया भी नहीं जाता। किसी बेहद काबिल को अपना कह पाने के सौभाग्य पर ही नाज किया जा सकता है। नाज खुद पर है, तो घमंड के बराबर है। घमंड उसे होता है, जो यह मानता है कि उसके जैसा दूसरा कोई नहीं। उसके पास जो है, वैसा किसी और के पास नहीं हो सकता। यह भाव तुलनात्मक है। लेकिन तुलना तो उनमें की जा सकती है, जिनमें ठहराव हो, बदलें न। जो सदा परिवर्तनशील है, उनमें तुलना सम्भव नहीं। शाश्वत हम हैं नहीं, तो नाज किस पर, और कैसा? न वक्त रुकता है और न हालात एक जैसे रहते हैं।
हम इंसान जिस दिन इन पर काबू पा लें, उस दिन कह सकते हैं कि हमें नाज है खुद पर। तब तक यही मानना चाहिए कि हम किसी को दे ही क्या सकते हैं। बस, जरिया हैं चीजों के अदल-बदल होने का।
http://www.visharadtimes.com/

नमक जहर है इसलिए ध्यान रखें वरना...


GAZALA KHAN
हमारे दैनिक जीवन के खाने पीने के पदार्थों में नमक एवं शक्कर का प्रयोग सामान्य रूप से देखा जाता है। हमारे मन में अक्सर यह सवाल उठता है।
हमें नमक क़ी कितनी मात्रा लेनी चाहिए,कई लोग तो ब्लडप्रेशर बढ़ जाने के डर से नमक बिल्कुल बंद कर देते हैं,वैसे भी शक्कर को यदि-स्वीटपोइजन-कहा जाता है, तो नमक के लिए-मिनरलपोइजन-शब्द का प्रयोग किया जाता है। नमक का अधिक मात्रा में प्रयोग अनावश्यक रूप से गुर्दों क़ी क्रियाशीलता को बढ़ाकर उनकी शक्ति को क्षीण करता है।
यह सत्य है,क़ि नमक हमारे भोजन में मिलने वाले स्वाद को बढाता है,लेकिन अधिक मात्रा में स्वास्थ्य पर इसका उल्टा प्रभाव पड़ता है। नमक का अधिक मात्रा में प्रयोग निम्न बिमारीयों में जीवन को दूभर बना सकता है।
सिरदर्द,नींद न आना,माइग्रेन,ह्रदय रोग,गुर्दे के रोग,लीवर क़ी बीमारी,गठिया,वातरोग आदि डॉ फ्रेडरीक मार्वूड द्वारा एक सौ कैंसर पीड़ितों में किये गए एक शोध के अनुसार एक को छोड़कर अधिकांश रोगी नमक के शौकीन पाए गए। हमारे शरीर को प्रतिदिन दो ग्रेन नमक की आवश्यकता होती है, जिसे हम केवल 50 ग्राम सब्जियों से प्राप्त कर सकते हैं,अर्थात यदि भोजन में पर्याप्त मात्रा में फल सब्जियों का प्रयोग हो तो अतिरिक्त नमक क़ी आवश्यकता ही नहीं है। यदि मोटे तौर पर कहा जाय तो नमक के अधिक लेने से फायदा कम और नुकसान अधिक है।
हाँ, यदि एक शारीरिक रूप से अधिक सक्रिय व्यक्ति को अतिरिक्त नमक लेना आवश्यक है। अन्यथा बदन दर्द,थकान जैसे लक्षण देखे जा सकते है।अतरू कहा जा सकता है , क़ि यदि आप अनिद्रा, उच्चरक्तचाप से पीड़ित हों तो आज ही नमक क़ी मात्रा अपने दैनिक भोजन में कम कर दें,देखें आपको अच्छी नींद आयेगी और आपका रक्तचाप काफी नियंत्रित हो जाएगा।

एक पत्ता रोज, धन के साथ मिलेगा अच्छा जीवन...
नई दिल्ली 23 अगस्त (वेबवार्ता)। धन या पैसा आज के समय सभी के लिए सबसे बड़ी आवश्यकता है। पैसों का महत्व इस बात से साफ प्रतीत होता है कि पैसा सबकुछ नहीं है लेकिन बहुत कुछ है।
कोई भी व्यक्ति हो, अमीर या गरीब, सभी को धन की आवश्यकता है। पैसों का काम केवल पैसा ही कर सकता है। इसी वजह से हम अपने स्तर पर अधिक से अधिक धन प्राप्त करने के लिए कई प्रकार के प्रयास करते हैं। ताकि हमारे घर-परिवार के सदस्यों को अभाव का जीवन न जीना पड़े।
ज्योतिष और धर्म शास्त्रों में धन प्राप्ति के अचूक उपाय बताए गए हैं। धन के लिए देवी महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त होना सबसे जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में ग्रह बाधाओं के चलते धन प्राप्ति के योग नहीं हैं तो उन ग्रह दोषों का उचित उपचार किया जाना चाहिए। इसके साथ ही देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के प्रयास करने चाहिए। शास्त्रों के अनुसार जिस घर में तुलसी का पौधा रहता है वहां दरिद्रता नहीं रहती।
तुलसी को पवित्र और पूजनीय माना गया है। इसकी प्रतिदिन पूजा से सभी देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है। जिससे घर के सदस्यों की आर्थिक परेशानियां दूर हो जाती हैं। इसके साथ ही वास्तु के अनुसार भी तुलसी का पौधा घर में होने से कई प्रकार के वास्तु दोष स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं।
आयुर्वेद के अनुसार एक तुलसी का पत्ता प्रतिदिन खाने से व्यक्ति हमेशा स्वस्थ बना रहता है। इसके अलावा व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। तुलसी पूजन के बाद एक पत्ता प्रसाद स्वरूप प्रतिदिन खाने से हमारी सभी समस्याएं समाप्त हो जाती हैं। आय के सभी स्रोतों से फायदा प्राप्त होता है।

Wednesday, 17 August 2011

साठ मिनट टीवी देखने से कम होंगे जिंदगी के 22 मिनट

GAZALA KHAN
मेलबर्न 17 अगस्त (वेबवार्ता)। हर रोज ज्यादा देर तक टीवी से चिपके रहने की आदत आपकी जिंदगी के कुछ कीमती साल कम कर सकती है। यह स्मोकिंग से भी ज्यादा खतरनाक है। एक ऑस्ट्रेलियाई स्टडी में यह दावा किया गया है।
यहां की क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ पॉपुलेशन हेल्थ द्वारा जारी इस स्टडी में कहा गया है कि टीवी देखना स्मोकिंग और मोटापे की तरह है। स्टडी टीम के प्रमुख लेनर्ट वीरमैन ने बताया कि हमने ऑस्ट्रेलिया में 11,000 लोगों पर स्टडी पर की और पाया कि 25 साल की उम्र के बाद हर एक घंटे टीवी देखने से जिंदगी के 22 मिनट कम हो जाते हैं। एक ऑस्ट्रेलियाई औसतन हर रोज दो घंटे टीवी देखता है। इससे अनुमान लगाया गया कि इस तरह एक पुरुष की आयु 1.8 साल कम हो जाती है , जबकि एक महिला की उम्र 1.5 साल कम हो जाती है। उन्होंने बताया कि अगर कोई व्यक्ति हर रोज 6 घंटे टीवी देखता है तो उसकी लाइफ के 4.8 साल घट जाते है। एक सिगरेट पीने से किसी इंसान के 11 मिनट धुएं में उड़े जाते हैं , जो कि एक घंटे टीवी देखने के मुकाबले कम हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि टीवी देखने से ज्यादा नुकसान होता है।
खास बात यह है कि स्मोकिंग करने वालों की तादाद तो कम होती जा रही है , लेकिन आज लगभग हर व्यक्ति टीवी देखता है। यही वजह है कि लोगां के स्वास्थ्य के मद्देनजर टीवी को ज्यादा बड़ा दुश्मन कहा जा सकता है। वीरमन ने कहा कि इंग्लैंड और स्कॉटलैंड में हुई कई अन्य स्टडीज में भी यह बात सामने आई है कि टीवी देखने से जिंदगी के कुछ साल कम हो जाते हैं।
                                                       http://www.visharadtimes.com/

एक ही मुलाकात में हो जाता है पुरुषों को प्यार

लंदन 17 अगस्त (वेबवार्ता)। पुरुष अपने स्वभाव के अनुसार जीवनसाथी चुनने में देर नहीं लगाते। बस एक डेटिंग और हो गया फैसला, लेकिन महिलाएं जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले अपने साथी से कम से कम छह बार मुलाकात करती हैं।
मानव व्यवहार पर किए गए शोध में पता चला है कि अधिकतर पुरुष पहली मुलाकात में ही दिल दे बैठते हैं। अध्ययन के मुताबिक पुरुष दावा करते हैं कि वे एक नजर में जान जाते हैं कि उन्हें प्यार हो गया है। वहीं महिलाएं इस मामले में फूंक-फूंक कर कदम रखती हैं। अध्ययन में दावा किया गया है कि महिलाएं किसी भी फैसले पर पहुंचने से पहले कम से कम छह मुलाकातों तक इंतजार करती हैं।
डेली मेल के मुताबिक, श्लगभग चार में से एक पुरुष ने कहा कि वो पहली नजर के प्यार में विश्वास रखते हैं और पलभर में जान लेते हैं कि लड़की उनके लिए मिस राइट है या नहीं।श् अध्ययन में बड़ी संख्या में पुरुषों के एकतरफा प्यार की बात भी सामने आई है। पुरुषों में पहले श्आई लव यूश् कहने की प्रवृति भी ज्यादा होती है। एक तथ्य दोनों में समान है कि पहला प्यार टूटने पर दुख का अहसास दोनों में बराबर होता है। इसके बावजूद सामान्यतरू महिलाएं अपने फैसले पर संतुष्ट रहती हैं, जबकि दिल टूटने के बाद पुरुषों के शोक में डूबने की ज्यादा आशंका होती है।

                      http://www.visharadtimes.com/                                                                                                 gazala khan

Sunday, 7 August 2011

इस्लाम के अहकाम

इस्लाम मे पांच अहकामों को अनिवार्य माना गया है इन में अहकामो में कल्मा, नमाज, रोजा, जकातऔर हज शामिल है। ईश्वर ने प्रत्येक मुसलमान (धनवान व्यक्ति) के लिए अनिवार्य किया है कि यदि उसके पास कम से कम साढ़े बावन तोला चाँदी या इसके मूल्य के बराबर धन हो और उसे रखे हुए पूरा एक वर्ष बीत जाए,तो वह उसमें से चालीसवाँ भाग अपने किसी ग़रीब नातेदार या किसी मोहताज, किसी असहाय निर्धन, किसी नवमुस्लिम, किसी मुसाफ़िर या किसी क़र्ज़दार व्यक्ति को दे दे। या सत्य-धर्म की सेवा व विस्तार में लगा दे।
<iframe width="560" height="349" src="http://www.youtube.com/embed/K9wPIkTRwv8" frameborder="0" allowfullscreen></iframe>
इस प्रकार ईश्वर ने धनवानों की सम्पत्ति में निर्धनों के लिए कम से कम ढाई प्रतिशत भाग निश्चित कर दिया है। इससे अधिक यदि कोई कुछ दे तो यह एहसान है जिसका पुण्य और अधिक होगा।
देखिए, यह हिस्सा अल्लाह को नहीं पहुँचता। उसे आपकी किसी चीज़ की आवश्यकता नहीं। परन्तु वह कहता है कि तुमने यदि प्रसन्नतापूर्वक मेरे लिए अपने किसी ग़रीब भाई को कुछ दिया तो मानो मुझको दिया, उसकी ओर से मैं तुम्हें कई गुना अधिक बदला दूँगा। हाँ, शर्त यह है कि उसको देकर तुम कोई एहसान न जताओ, उसका अपमान न करो, उससे धन्यवाद की आशा न रखो, यह भी कोशिश न करो कि तुम्हारे इस दान की लोगों में चर्चा हो और लोग तुम्हारी प्रशंसा करें कि अमुक सज्जन बड़े दानी हैं। यदि इन सभी नापाक विचारों से अपने मन को शुद्ध रखोगे और केवल मेरी प्रसन्नता के लिए अपने धन में निर्धनों को हिस्सा दोगे तो मैं अपने असीमित धन में से तुमको वह हिस्सा दूँगा जो कभी समाप्त न होगा।
ईश्वर ने इस ‘ज़कात’ को भी हमारे लिए उसी प्रकार अनिवार्य किया है जिस प्रकार नमाज़ और रोज़े को अनिवार्य किया है। यह इस्लाम का बहुत बड़ा स्तंभ है और इसे स्तंभ इसलिए माना गया है कि यह मुसलमानों में ईश्वर (की प्रसन्नता) के लिए बलिदान और त्याग का गुण पैदा करता है। स्वार्थ, तंगदिली और धन-लोलुपता के बुरे गुण को दूर करता है। धन की पूजा करनेवाला और रुपये पर जान देनेवाला लोभी और कंजूस व्यक्ति इस्लाम के किसी काम का नहीं। जो व्यक्ति ईश्वर की आज्ञा से अपने गाढ़े पसीने की कमाई बिना किसी निजी स्वार्थ के निछावर कर सकता हो वही इस्लाम के सीधे मार्ग पर चल सकता है। ज़कात मुसलमानों को इस बलिदान और त्याग का अभ्यास कराती है और उसको इस योग्य बनाती है कि ईश्वर के मार्ग में जब माल ख़र्च करने की आवश्यकता हो, तो वह अपने धन को सीने से चिपटाए न बैठा रहे बल्कि दिल खोलकर ख़र्च करे।
http://www.visharadtimes.com/

Monday, 1 August 2011

नेत्रहीन मूर्तिकार का अनोखा कारनामा

इटली के एक नेत्रहीन मूर्तिकार ने। जब फेलिस टैगलिफेरी को अपने ही देश में जीसस की एक विख्यात प्रतिमा को छूने नहीं दिया गया, तो उन्होंने खुद वैसी ही प्रतिमा बनाने की ठान ली और असंभव काम को संभव कर दिखाया। उन्होंने जीसस की सफेद चादर ओढ़े हुए एक ऐसी प्रतिमा की अनुकृति को आकार दिया जिसे उन्होंने देखना तो दूर छुआ तक नहीं। यकायक इस पर यकीन करना मुश्किल है।
सन 1753 में इटली के नेपल्स में प्रख्यात मूर्तिकार ग्विसेप सेनमार्टिना ने जीसस की महीन चादर में लिपटी सफेद प्रतिमा बनाई थी। इसका नाम है क्रिस्टो वेलेटो है। इस मूर्ति की वजह से नेपल्स को बाद में एक पर्यटन स्थल के रूप में पहचान मिली।
एक दिन 41 वर्षीय फेलिस भी इस स्थान पर आए, तो उन्हें यह मूर्ति छूने की इजाजत नहीं दी गई। फेलिस ने इसे चुनौती के रूप में लिया। इस काम में तमाम विकलांग लोगों ने भी उनकी मदद की। जिन लोगों ने क्रिस्टो वेलेटो को देखा था, उन्होंने फेलिस के दिमाग में इस मूर्ति की छवि पैदा करने में उनकी मदद की। बस फिर क्या था उन्होंने देखते-देखते उस अनदेखी प्रतिमा को मूर्त रूप दे दिया और इसे क्रिस्टो रि वेलेटो नाम दिया। अब स्वयं पोप इसे देखने आएंगे। इसके अलावा इसे इटली के विभिन्न मुख्य शहरों में लोगों के दर्शन के लिए भी रखा जाएगा।
                                                                                                             gazala khan

मनुष्य की बुद्धिमत्ता अपने चरम पर

अब मनुष्य की बुद्धिमत्ता अपने चरम पर पहुच गई है इससे ज्यादा और विकसित नही होगा मनुष्य का दिमाग। ये मानना है वैज्ञानिको का। एक शोध में दावा किया गया है कि मनुष्य के दिमाग में जितनी चतुराई और चालाकी अब है, पहले कभी नहीं थी। अध्ययन में दावा किया है कि चालाक से चालाक व्यक्ति के दिमाग में भी अब और ज्यादा विकास नहीं होगा क्योंकि मनुष्य के दिमाग के प्रमुख हिस्से ‘ग्रे मैटर’ का विकास पूरी तरह हो चुका है। ब्रिटिश अखबार ‘द सन’ की रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
अध्ययन में वैज्ञानिकों ने मस्तिष्क की संरचना और उसके द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली ऊर्जा पर प्रमुख जोर दिया। उन्होंने पाया कि दिमाग में कोशिकाएं पूरी तरह विकसित हो चुकी हैं। अब वहां नई कोशिकाओं के बनने की जगह नहीं है। अध्ययन में यह भी बताया गया है कि दिमाग में कोशिकाओं के बीच संबंध (कनेक्शन) में विस्तार अब नहीं होने वाला।
शोधकर्ताओं ने पाया कि जिस व्यक्ति के दिमाग में कोशिकाएं अच्छे ढंग से एक-दूसरे से संबंधित रहती हैं, उसका आई क्यू (बुद्धिमत्ता) औरों से बेहतर होता है। अध्ययन के एक भाग में दिमाग की कोशिकाओं द्वारा खर्च की जाने वाली ऊर्जा के बारे में बताया गया है। इसके मुताबिक, दिमाग शरीर के कुल वजन का मात्र दो फीसदी होता है, लेकिन शारीरिक ऊर्जा का 20 फीसदी भाग दिमागी गतिविधियों में ही खर्च हो जाता है।
                                                                                                                                    GAZALA KHAN