हर बार नया साल नई खुशियां, नई उमंग, नई उम्मीदें और जश्न मनाने के तमाम नए कारण लेकर आता है लेकिन आप अपना उत्साह थोड़ा बचाकर रखियो क्योंकि भारत ही नहीं दुनिया के तमाम देशों में कई बार नए साल के मौके आते हैं। चौंकिए नहीं दुनिया भर में तमाम कैलेंडर हैं और हर कैलेंडर का नया साल अलग-अलग होता है। एक मोटे अनुमान के अनुसार अकेले भारत में ही करीब 50 कैलेंडर (पंचांग) हैं और इनमें से कई का नया साल अलग दिनों पर होता है। एक जनवरी को मनाया जाने वाला नववर्ष दरअसल गेगोरियन कैलेंडर पर आधारित है। इसकी शुरुआत रोमन कैलेंडर से हुई है। पारंपरिक रोमन कैलेंडर का नववर्ष एक मार्च से शुरू होता है। प्रसिद्ध रोमन सम्राट जूलियस सीजर ने 47 ईसा पूर्व में इस कैलेंडर में परिवर्तन किया और इसमें जुलाई माह जोड़ा। इसके बाद उसके भतीजे के नाम के आधार पर इसमें अगस्त माह जोड़ा गया। दुनिया भर में आज जो कैलेंडर प्रचलित है उसे पोप गेगोरी अष्टम ने 1582 में तैयार किया था। ग्रेगोरी ने इसमें लीप ईयर का प्रावधान किया था। ईसाइयों का एक अन्य पंथ ईस्टर्न आर्थोडाक्स चर्च तथा इसके अनुयायी गेगोरियन कैलेंडर को मान्यता न देकर पारंपरिक रोमन कैलेंडर को ही मानते हैं। इस कैलेंडर के अनुसार नव वर्ष 14 जनवरी को मनाया जाता है। इस कैलेंडर की मान्यता के अनुसार जार्जिया, रूस, यरूशलम, सर्बिया आदि में 14 जनवरी को नववर्ष मनाया जाता है।
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इस्लाम धर्म के कैलेंडर को हिजरी साल के नाम से जाना जाता है। इसका नववर्ष मोहर्रम माह के पहले दिन होता है। मौजूदा हिजरी संवत 1430 इस साल 30 दिसंबर को शुरू हुआ था। हिजरी कैलेंडर कर्बला की लड़ाई के पहले ही निर्धारित कर लिया गया था। मोहर्रम के दसवें दिन को आशूरा के रूप में जाना जाता है। इसी दिन पैगम्बर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन बगदाद के निकट कर्बला में शहीद हुए थे। आशूरा इस बार आठ जनवरी को होगा। हिजरी कैलेंडर के बारे में एक दिलचस्प बात है कि इसमें चंद्रमा की घटती बढ़ती चाल के अनुसार दिनों का संयोजन नहीं किया गया है। लिहाजा इसके महीने हर साल करीब 10 दिन पीछे खिसकते रहते हैं। यदि पड़ोसी देश और देश की पुरानी सभ्यताओं में से एक चीन की बात करें तो वहां का भी अपना एक अलग कैलेंडर है। तकरीबन सभी पुरानी सभ्याताओं के अनुसार चीन का कैलेंडर भी चंद्र गणना पर आधारित है। इसका नया साल 21 जनवरी से 21 फरवरी के बीच पड़ता है। चीनी वर्ष के नाम 12 जानवरों के नाम पर रखे गए हैं। चीनी ज्योतिष में लोगों की राशियां भी 12 जानवरों के नाम पर होती हैं। लिहाजा यदि किसी की बंदर राशि है और नया वर्ष भी बंदर आ रहा हो तो वह साल उस व्यक्ति के लिए विशेषतौर पर भाग्यशाली माना जाता है।
भारत भी कैलेंडरों अर्थात पंचांग के मामले में कम समृद्ध नहीं है। फिलहाल देश में विक्रम संवत, शक संवत, हिजरी संवत, फसली संवत, बांग्ला संवत, बौद्ध संवत, जैन संवत, खालसा संवत, तमिल संवत, मलयालम संवत, तेलुगु संवत आदि तमाम साल प्रचलित हैं। इनमें से हर एक के अपने अलग-अलग नववर्ष होते हैं। देश में सर्वाधिक प्रचलित विक्रम संवत और शक संवत है। माना जाता है कि विक्रम संवत गुप्त सम्राट विक्रमादित्य ने उज्ज्यनी में शकों को पराजित करने की याद में शुरू किया था। यह संवत 58 ईसा पूर्व शुरू हुआ था। विक्रम संवत चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होता है। इसी समय चैत्र नवरात्र का प्रारंभ होता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन उत्तर भारत के अलावा गुड़ी पड़वा और उगादी के रूप में भारत के विभिन्न हिस्सों में नव वर्ष मनाया जाता है। सिंधी लोग इसी दिन चेटी चंद के रूप में नव वर्ष मनाते हैं। शक सवंत को शालीवाहन शक संवत के रूप में भी जाना जाता है। माना जाता है कि इसे शक सम्राट कनिष्क ने 78 ई. में शुरू किया था। स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार ने इसी शक संवत में मामूली फेरबदल करते हुए इसे राष्ट्रीय संवत के रूप में अपना लिया। राष्ट्रीय संवत का नव वर्ष 22 मार्च को होता है जबकि लीप ईयर में यह 21 मार्च होता है।
http://visharadtimes.com/
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Gazala khan
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