हमारे देश में आई लव यू आ गया है। अंग्रेज़ आये तब नहीं आया। उन्होंने डेढ़ सौ साल राज किया तब नहीं आया। टीवी आया तब भी नहीं आया। उसे तो सैटेलाइट चैनलों का इंतज़ार था। जैसे ही विदेशी सैटेलाइट चैनल आये, आई लव यू भी आ गया। जब तक सैटेलाइट चैनल नहीं आये थे, लगता है हमारे यहां प्रेम होता ही नहीं था। हीरो-हीरोइन के बीच में हमेशा एक पेड़ खड़ा रहता था। कितना बड़ा हीरो हुआ दिलीप कुमार, ट्रैजेडी किंग! प्रेम की खातिर जान दे देना उसकी स्पेशलिटी थी। देवदास पारो के लिए तड़पता रहा। पारो देवदास के लिए तड़पती रही। पर, कभी आई लव यू नहीं कहा। और, राजकपूर आवारा, चार सौ बीस, जोकर! लेकिन मज़ाक में भी नरगिस से नहीं कहा, आई लव यू। हमारी संस्कृति में प्रेम व्यवहार में होता है, वाक्य में नहीं। प्रेम आचरण में होता है, संवाद में नहीं। हमारे यहां कबीर ने कहा है, ढाई आखर प्रेम का पढ़ै सो पंडित होय। कबीर ने पढ़ै कहा, बोलै नहीं। पढ़ना आचरण है, बोलना दिखावा है। और पढ़ै सो पंडित होय कहा, पढ़ै सो प्रेमी होय नहीं कहा। क्योंकि प्रेम सिर्फ भावना नहीं है, ज्ञान भी है।
पर, अब ज्ञान गायब होता जा रहा है। छोकरे छोकरी स्कूल तो जाते नहीं, स्टूडियो चले जाते हैं, हीरो हीरोइन बनने। जाते ही इलू इलू करने लगते हैं। हाईस्कूल तो पास कर नहीं पाते, लव की डिग्री पा लेते हैं आई लव यू! आज टीवी कार्यक्रमों में सबसे ज़्यादा लोकप्रिय डायलएग यही है, आई लव यू। हीरो हीरोइन से कहे तो ठीक, पर बेटा बाप से कहता है, आई लव यू। बाप बेटी से कहता है, आई लव यू। बेटी मां से कहती है, आई लव यू। अफसर सेक्रेटरी से कहता है, आई लव यू। अफसर की बीवी पड़ोसी से कहती है आई लव यू। हर प्रोग्राम आई लव यू है, हर संबंध आई लव यू है। जायज़ रिश्ता भी आई लव यू, नाजायज़ रिश्ता भी आई लव यू। प्रेम इतना मैला कभी नहीं हुआ था, जितना टीवी ने कर दिया। हमारा देश अजीब विकास कर रहा है। आर्थिक विकास में तो हांगकांग तक भी नहीं पहुंचा, मनोरंजन के विकास में सीधा अमेरिका पहुंच गया।
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आजकल, हीरो जब बगीचे में हीरोइन से मिलता है तो हलो बाद में बोलता है, पहले आई लव यू कहता है। फिर, लड़की का हाथ पकड़ लेता है। लड़की फौरन टेढ़ी हो जाती है। भुजंगासन की मुद्रा में पीठ को पीछे की ओर ऐसे मोड़ती है कि हीरो अगर पकड़े नहीं तो गिर ही पड़े। कोई कोई हीरोइन तो इतनी ज़्यादा मुड़ जाती है कि पता ही नहीं चलता वह खड़ी है या लेटी है। बगीचा बेडरूम बन जाता है।
हर फिल्म में प्रेम होता है। हीरो हीरोइन इलू इलू बोलते ही रहते हैं। एक निर्माता बोला मैं कुछ नया करूंगा। स्त्री पुरुष का प्रेम तो बहुत दिखा लिया, मैं कोई दूसरा प्रेम दिखाऊंगा। आजकल पर्यावरण की रक्षा का फैशन है। सो, उसने सोचा कुदरत का प्रेम दिखाया जाये। तो, हीरो एक नारियल के पेड़ के पास पहुंचा और बोला, आई लव यू। पेड़ ने आई लव यू का जवाब दिया। ऊपर से एक नारियल गिरा। क्या है कि कुदरत को झूठ बरदाश्त नहीं होता।
दूसरे प्रोड्यूसर ने सोचा संस्कृति का प्रेम दिखाया जाये। जबसे बीजेपी की ताकत बढ़ी है सबको संस्कृति याद आने लगी है। कुदरत का प्रतीक पेड़ है तो संस्कृति का प्रतीक हिमालय है। हीरो हिमालय पर गया। पहाड़ वीरान खड़े थे। हीरो चिल्ला कर बोला, आई लव यू। पहाड़ों पर चांदी जैसी चमकदार बर्फ जम गयी। अब हीरोइन की बारी थी। उसने अपना डायलएग नाक से बोला। हीरोइन का खयाल था कि नाक से बोलने पर उसकी आवाज़ सेक्सी हो जाती है। हिंदुस्तान में भी सेक्सी अब इज़्ज़तदार शब्द मान लिया गया है।
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| gazala khan |
तो हीरोइन अपनी नकसुरी आवाज़ में बोली, आई लव यू। गोमुख सूखा पड़ा था, उसमें से गंगा बहने लगी। ये कम्प्यूटर भी कमाल की चीज़ है। अपने स्पेशल इफेक्ट से वह नंगे पहाड़ों पर बर्फ जमा सकता है, सूखे गोमुख से गंगा बहा सकता है। किसी भी विदेशी औरत के नंगे शरीर पर भारतीय संस्कृति का चेहरा चिपका सकता है। इस देश में आई लव यू का फैशन तो आ गया, अब आगे का न आये तो अच्छा। वरना टीवी की यह अपसंस्कृति विकृतियों की ऐसी धारा बहायेगी कि हमारा सब कुछ उसमें बह जायेगा
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