उसको आती है मेरी यादमगर देर से आती है
हमको तो उसकी याद
हर पल ही सताती है
वो आके ये कहते हैं
कि फुरस्त न मिली हमको
उल्फत में तो फुरस्त उल्फत
ही दिलाती है
बेचौन से रहतें हैं हम
उसकी जुदाई में
क्या उसको हमारी याद
बिल्कुल न तड़पाती है
आंखे लगी रहती हैं
हरदम हर एक आहट पर
एक वों हैं कि वादा
कभी न निभाती हैं
गजाला खान

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