शिक्षा को सूचना, संचार प्रौद्योगिकी से जोड़ने की कवायद के तहत सरकार को आने वाले वर्षाे में 22 करोड़ सस्ते टैबलेट लैपटॉप (आकाश) की जरूरत है। इन जरुरतों को पूरा करने के लिए निविदा प्रक्रिया की तैयार चल रही है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एन के सिन्हा ने कहा कि प्रारंभ में जमीनी परीक्षण के लिए एक लाख (आकाश) बनाने का निर्णय किया गया था, लेकिन इससे मकसद हल नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा कि मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने आने वाले वर्षाे में 22 करोड़ आकाश की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि इतनी संख्या में आकाश के निर्माण के लिए नए सिरे से निविदा जारी की जाएगी और डाटाविंड (आकाश का निर्माण करने वाली कंपनी) के अलावा अन्य को भी मौका मिलेगा।
अतिरिक्त सचिव ने कहा, ‘निविदा प्रक्रिया की तैयारी चल रही है।’ कुछ बड़ी कंपनिया इसे 44 हजार करोड़ रुपये के कारोबारी अवसर तो कुछ इसे अपने कारोबार के मार्ग में बाधा के रूप में देख रही हैं। आकाश की गुणवत्ता के बारे में सामने आ रही शिकायतों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इस सस्ते टैबलेट लैपटाप की बैटरी, प्रोसेसर और आर्किटेक्चर के संबंध में शिकायत प्राप्त हुई थी।
इसमें सुधार कर दिया गया है। बैटरी की क्षमता में जहा डेढ गुणी वृद्धि की गई है, वहीं प्रोसेसर को 366 मेगा हर्ट्ज से बढ़ाकर 700 मेगा हर्ट्ज कर दिया गया है। इसके आर्किटेक्चर को भी बेहतर बनाया गया है जबकि कीमत 2,276 रुपये ही रखी गई है। उन्नत आकाश की क्षमता में पहले की तुलना में तीन गुणा वृद्धि की गई है, साथ ही इसपर यू ट्यूब से भी डाउनलोड किया जा सकता है। इसकी मेमोरी क्षमता में भी वृद्धि की गई है। आकाश के बारे में आ रही शिकायतों के बारे में हालाकि एक वर्ग का मानना है कि यह कुछ बड़ी कंपनियों की साजिश का परिणाम हो सकता है।
परियोजना से जुड़े एक वर्ग का कहना है कि कुछ कंपनिया चाहती हैं कि यह परियोजना बंद हो जाए, ताकि उनका धधा सुचारू रूप से चलता रहे, जबकि कुछ कंपनिया इसे 44 हजार करोड़ रुपये के कारोबारी अवसर के रूप में देख रही है। हालाकि एक ऐसा वर्ग भी है जो चाहता कि आकाश की कीमत 2,276 रुपये ही रहे और समय के साथ इसकी गुणवत्ता में वृद्धि की जाए। मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि अमेरिका, पनामा, इक्वाडोर समेत कई अफ्रीकी देशों से आकाश की माग आई है।
डाटाविंड की ओर से आकाश की बिक्री किए जाने के बारे पूछे जाने पर अधिकारी ने कहा कि कंपनी आकाश के नाम से टैबलेट नहीं बेच सकती है, लेकिन अन्य प्रारूप को बेच सकती है। इस परियोजना के लिए जितनी अधिक संख्या में कंपनिया आएंगी, वह उतच अच्छा होगा। तमाम झझावतों से गुजरते हुए छात्रों के लिए सस्ता लैपटाप मुहैया कराने की सरकार की परिकल्पना को मुकाम तक पहुंचने में छह वर्ष लग गए ,जब पिछले वर्ष 2,276 रुपये कीमत की आकाश पेश किया गया। सरकार इस पर 50 प्रतिशत की सब्सिडी प्रदान करेगी और अभी यह छात्रों को करीब 1,100 रुपये में उपलब्ध हो रहा है।
इस उपकरण को मानव संसाधन विकास मंत्रालय की राष्ट्रीय स्कूली शिक्षा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी नीति (एनएसईआईसीटी) और आईआईटी राजस्थान के सहयोग से तैयार किया गया है जिसका निर्माण ‘डाटाविंड’ नामक कंपनी ने किया है। इसी परियोजना को फरवरी 2009 में हरी झडी दिखाई गई थी और इस उद्देश्य के लिए 4,612 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था।
प्रारंभ में इस परियोजना के तहत 10 डालर में छात्रों के लिए लैपटाप तैयार करने की योजना बनाई गई थी जो बाद में 35 डालर रखी गई ,हालाकि वर्तमान में इसकी लागत 49 डालर आई है। सात इंच के इस टच स्क्रीन टैबलेट लैपटाप में हार्ड डिस्क तो नहीं है लेकिन लिनक्स आधारित इस उपकरण को 32 जीबी के बाहरी हार्ड ड्राइव से जोड़ा जा सकता है।च् मैसेच्यूसेट्य इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी ख्एमआईटी, के 100 डालर की लैपटाप परियोजना की तर्ज पर मानव संसाधन मंत्रालय ने 2005 में इस योजना की परिकल्पना की थी।
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| Mukarram Khan |
इस टच स्क्रीन लैपटाप में दो यूएसबी का पोर्ट है और इसकी बैटरी में तीन घटे कार्य करने की क्षमता है। यह लैपटाप सौर ऊर्जा के उपयोग से भी चल सकता है। इस उपकरण में वर्ड, एक्सेल, पावर प्वायंट, पीडीएफ, ओपेन आफिस, वेब ब्राउजर और जावा स्क्रीप्ट भी संलग्न है। इसमें जिप-अनजिप तथा वीडियो स्ट्रीमिंग सुविधा भी है। इंटरनेट सुविधा से लैस इस उपकरण में मीडिया प्लेयर, वीडियो काफ्रेंसिंग और मल्टी मीडिया कंटेन्ट सुविधा उपलब्ध है। यह लैपटाप कठिन परिस्थितियों में भी काम कर सकता है।


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