Tuesday, 1 November 2011

2जी घोटाला: नये नोट पर नया विवाद

वित्त मंत्रालय के उस नोट को लेकर उठा विवाद फिलहाल थमता नहीं दिख रहा जिसमें तत्तकालीन वित्त मंत्री पी़ चिदंबरम को 2जी घोटाले के लिये एक तरह से जिम्मेदार ठहराया गया है। अब एक नया दस्तावेज सामने आया है जिसमें कहा गया है कि यह नोट प्रधानमंत्री कार्यालय और केबिनेट सचिवालय के साथ विचार विमर्श के बाद नये सिरे से तैयार किया गया था। वित्त मंत्री द्वारा प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र के माध्यम से प्रकाश में आई नयी जानकारी के अनुसार वित्त मंत्रालय के 25 मार्च के 2जी मामले में जारी नोट को लेकर उठे विवाद के बीच वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से कहा था कि विवादास्पद नोट में वह वाक्य कैबिनेट सचिवालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ विचार विमर्श के बाद ही इसमें जोड़ा गया जिससे लगता है कि इस मामले में चिदंबरम का भी दोष है।   
   
मुखर्जी ने न्यूयार्क में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात कर यहां लौटने के बाद इस संबंध में प्रधानमंत्री को 26 सितंबर को पत्र लिखकर यह स्थिति स्पष्ट की थी। इसमें लिखा गया कि आर्थिक मामला विभाग तो मामले में औपचारिक कार्यालय अनुस्मरण-पत्र को अंतिम एप दिये जाने के बाद नोट को भेजने के पक्ष में ही नहीं था। प्रधानमंत्री कार्यालय में संयुक्त सचिव के आर्थिक मामले विभाग सचिव को फोन करने के बाद ही उनके कहने पर 25 मार्च 2011 को यह संदेश औपचारिक कार्यालय अनुस्मरण के रूप में भेजा गया। वित्त मंत्रालय के 25 मार्च के इस नोट को लेकर बड़ा विवाद उठ चुका है। सूचना के अधिकार के तहत सार्वजनिक हुये इस नोट के एक वाक्य को लेकर ततकालीन वित्त मंत्री पी़ चिदंबरम 2जी मामले में विवादों में घिर गये। इसमें कहा गया है कि वर्ष 2008 में वित्त मंत्री के तौर पर चिदंबरम 2जी मामले में स्पेक्ट्रम की नीलामी के लिये जोर देकर घोटाला होने से रोक सकते थे।
   
पत्र में कहा गया है मीडिया और विपक्ष ने जिस तरह से इस एक वाक्य को उछाला है उसे देखते हुये उन परिस्थितियों को स्पष्ट करना जएरी हो जाता है जिनकी वजह से आर्थिक मामले विभाग ने यह संदेश भेजा और कैसे यह वाक्य इस नोट में आया। मुखर्जी ने स्थिति स्पष्ट करते हुये पत्र में कहा कि आर्थिक मामले विभाग के नोट का कैबिनेट सचिवालय में संयुक्त सचिव ने 18 मार्च 2011 को ई़मेल के जरिये जवाब दिया। इसमें कहा गया आपने जो नोट भेजा है उसे व्यापक एप देकर सुधारा गया है, डीजी ने कहा, मैं आपको इसके साथ संलग्न के तौर पर सुधारा गया नोट भेज रहा हूं। इसमें जो भी सुधार किये गये वह इस धारणा के साथ किये गये कि मुददों को पूरे विस्तार से बताया जाये।
   
मुखर्जी के पत्र में ईमेल का हवाला देते हुये कहा गया दो नये पैराओं जिन्हें हरे रंग से मार्क किया गया था, इसमें कहा गया था कपया इसे देखें और यदि आगे विचार विमर्श की जएरत पड़े तो वापस आ सकते हैं। मुखर्जी ने कहा कि यह वाक्य केबिनेट सचिवालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ विचार विमर्श के बाद ही नोट के 17वें पैरा में यह सामने आया है।
Gazala Khan
प्रस्तुति
इस पैरा में कहा गया है कि वित्त मंत्रालय 4.4 मेगाहटर्ज स्पेक्ट्रम की नीलामी को लेकर अडिग रहता तो दूरसंचार विभाग संबंधित अनुच्छेद का इस्तेमाल करते हुये लाइसेंसों को निरस्त कर सकता था। मुखर्जी ने पत्र में कहा चूंकि मामला उच्चतम न्यायालय के विचाराधीन है प्रधानमंत्री जैसा भी उचित समझें उनकी सूचना और कारवाई के लिये मामला उनके समक्ष है।


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