![]() |
| GAZALA KHAN |
साधो, शहर में डॉग शो होने की खबर है। ऊंची नस्ल के कुत्ते इतराते हुए घूमने लगे हैं। उनकी पूंछें कुछ ज्यादा ही ऊपर उठ गई हैं। जिनके पूंछ नहीं हैं, वे उठाने को तरस रहे हैं। पूंछकटा कुत्ता मालिक के सामने अपनी वफादारी दिखाए, तो कैसे। पूंछ हिलाना कुत्तों का जन्मसिद्ध अधिकार है। पर लोग हैं कि बेरहमी से कुत्तों की पूंछ काटकर उन्हें इस बुनियादी हक से वंचित कर देंते हैं।
खबर है कि शो के लिए ढाई सौ से ज्यादा बाहरी कुत्तों ने शहर में इंट्री कर ली है। उन्हें शो में भाग लेने के लिए स्पेशल ट्रेनिंग दी जाने लगी है। उनकी डाइट का खास ध्यान रखा जा रहा है। उन्हें रिंग में चलने का स्टाइल सिखाया जा रहा है। उठने-बैठने, सैल्यूट करने और जजों के सामने खड़े होने का अंदाज बताने की कवायद चल रही है। मालिक के साथ किस तरह चला जाए, यह सिखाने के लिए उनकी विशेष कोचिंग जारी है। सिट, हेड डाउन, कम, बैक, गो, स्पीक, अटैक, टेक, डोंट टेक जैसी बातें बताने के लिए दिन-रात एक किया जा रहा है।लैब्राडोर, ग्रेड डेन, रॉड व्हीलर, डोबरमैन, साइबेरिन हस्की, यार्कशायर टेरियर, शार्पी ब्रीड के डॉग्स जहां ट्रेनिंग ले रहे हैं, वह जगह देसी नस्ल के कुत्तों को कहां नसीब! आदमी ही नहीं, कुत्ते भी भाग्य लेकर पैदा होते हैं। बाहर सड़कों पर घूमते आवारा कुत्ते विदेशी नस्ल के इन कुत्तों को ईष्र्या भरी नजरों से देख रहे हैं। वे सोचते हैं कि ईश्वर को जब कुत्ता ही बनाना था, तो सबको एक-सा बनाते।
डॉग्स कहे जाने वाले कुत्तों को देखकर लगता है कि ये फरिश्ते हैं। इनके साथ खूबसूरत मालकिनें हैं, भव्य गाड़ियां हैं, ये एसी से निकल कर फिर एसी में जा घुसते हैं। खुशबूदार साबुन से नहाते हैं और गद्देदार बिस्तर पर सोते हैं। ये खुशनसीब कुत्ते कुत्ते की जिंदगी नहीं जीते, न ही कुत्ते की मौत मरते हैं। इन्हें कुत्ता कहना इनका अपमान करना है। इनके नाम विलायती होते हैं। इन्हें पुकारो, तो इनके मालिक की शान में इजाफा होता है। ये कुत्ते न होकर स्टेटस सिंबल हैं।
विदेशी कुत्ता ले आओ, तो कॉलोनी में दबदबा बढ़ जाता है। जिसके हाथ में कुत्ते का पट्टा होता है, वह फिर आदमी नहीं रहता, कुछ और हो जाता है। आदमी का ओहदा कुत्ते के साथ जुड़ जाता है। यानी कुत्ता पहले, आदमी बाद में। दूसरी ओर सड़कों पर भटकने वाले कुत्ते सर्वहारा श्रेणी के होते हैं। वे सर्वहारा पैदा होकर, सर्वहारा जीकर सर्वहारा की मौत मर जाते हैं। ऊंची नस्ल के कुत्ते की मौत पर उनके मालिक बेहाल होते हैं। सर्वहारा कुत्ते के मरने पर किसी को रोना नहीं आता। इन सर्वहारा कुत्तों की मौत अफसोस के लायक भी नहीं होती।

No comments:
Post a Comment