Sunday, 4 September 2011

गरीबों की मजबूरी, अमीरों की पसंद

WARISHA KHAN
बिहार तथा अभावग्रस्त पूर्वी उत्तर प्रदेश में कभी गरीबों का भोजन रहा बाटी चोखा अब बदलते परिवेश तथा फैशन में बडे लोग और अमीरों की थाली की पसंद बन चुका है। लगभग 50 वर्ष पूर्व तक पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के गरीब लोग बाटी चोखा खाकर ही गुजारा कर लेते थे। वह भी कण्डे की आग पर बनी बाटी तथा आलू और नमक का चोखा ही उनका प्रिय भोजन बन गया था। उस समय पूर्वी उत्तर प्रदेश के गांवों में आवागमन का कोई साधन नही था। इस कारण लोग पैदल ही यात्रा करते थे तथा रात में किसी गांव में रुकने पर झोले में रखा आटा तथा आलू कण्डे पर रख पकाते और बाटी चोखा बनाकर अपना भूख मिटा लेते थे। बदलते परिवेश में बाटी चोखा आज भी लोगों का पसंद बना हुआ है। अब तो बडे बडे लोग बाटी चोखा बनवा कर उसका स्वाद ले रहे हैं।
बाटी चोखा तो वही है लेकिन उसके खाने वाले तथा बाटी चोखा में पडने वाले सामाग्री का रुप बदल गया है। पहले गरीब जो बाटी चोखा खाता था वह आटे की बनी बाटी व आलू नमक का चोखा हुआ करता था1 लेकिन अब बाटी चोखा बडे बडे घरों में शौकिया बन रहा है। उस बाटी में आटे के अंदर चने के बने सत्तू में कई प्रकार के मसाले का प्रयोग कर बाटी तैयार की जा रही है तथा उसमें शुद्ध घी का भी प्रयोग किया जाता है। चोखे में आलू के साथ बैगन। टमाटर या परवल. लहसुन और हरी धनियां की पत्ती का प्रयोग कर इसका जायका और बढाया जाता है।
एक 84 वर्षीय स्थानीय नागरिक श्री भागवत का कहना है कि बाटी चोखा तो वही है लेकिन अब यह गरीब का भोजन न हो के बडे शाकाहारी लोगों के शान का भोजन हो गया है। उनका कहना है कि अब तो बडी पार्टियों में बाटी चोखा का मीनू रखा जा रहा है तथा लोग इसे बडे चाव से खा रहे है। राजधानी लखनऊ समेत पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई शहरों जैसे देवरिया, गोरखपुर, मऊ, कुशीनगर, बलिया, गाजीपुर, बस्ती और बनारस में अच्छी बाटी। चोखा की दुकाने देखी जा सकती है। जहां लोग बडे चाव से इसका स्वाद लेते दिखाई पड जायेंगे। बाटी और चोखे का भोजन करने के पीछे स्वास्थ्य वर्धक तथ्य यह है कि सप्ताह में एक बार भोजन करने पर सामान्य भोजन से थोडा कडा होने के कारण यह आंत की सफाई कर देते हैं। सुपाच्य होने के कारण इस भोजन का कोई साइड इफेक्ट तो नही है। आज लोगों में स्वास्थ्य एवं कैलोरी के प्रति जो जागरुकता है। उसमें भी यह भोजन सहायक है। डाक्टर सचीन्द्र का कहना है कि सप्ताह में एक बार यह भोजन करने से शरीर की पाचन शक्ति बनी रहती है।
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